एक अध्यापक कभी नहीं रुकता

Home / Forums / Creative Expressions / एक अध्यापक कभी नहीं रुकता
Viewing 1 post (of 1 total)
  • Profile photo of Senior Express
    Senior Express
    January 18, 2018 at 7:06 pm #26884

     चौ. ब्रह्मसिंह ने अपने जीवन के अस्सी वसंत और पतझड़ से संग्रहित खट्टे-मीठे अनुभवों को अपनी पुस्तक ‘जीने की राह’  के अनेक भागों में लेखों और कहानियों के माध्यम से उकेरा है। अध्ययन और अध्यापन का व्यवहारिक अनुभव प्राप्त कर उन्हें न केवल अपने जीवन में उतारा बल्कि समाज सेवा में रूचि होने के कारण अपने उस अनुभव को अपने व्यवहार और कर्म के माध्यम से परहित के उद्देश्य से समाज में भी बिखेरा है। उन्होंने समाज के प्रत्येक क्षेत्र और उसकी व्यवस्था को अन्दर से झांक कर देखा तथा उसके लिए काम किया और फिर अपने उसी अनुभव को अपने लेखों एवं कहानियों के द्वारा पाठकों के समक्ष रखा है।

    पैंतीस वर्ष के अध्यापन से एवं एक व्यवहारिक सकारात्मक जीवन जीकर जो अनुभव प्राप्त किया, उसी को अपनी पुस्तकों में लिखकर समाज को समर्पित करने का उनका यह कार्य निश्चय ही प्रशंसनीय एवं सम्मान के योग्य है। अंग्रेजी और हिन्दी दोनों ही भाषाओं पर समान अधिकार रखने के कारण उनकी भाषा सरल, शैली प्रभावशाली तथा विचार स्पष्ट हैं। उन्होंने अपने लेखों और कहानियों में नित्य प्रति की बोली जाने वाली भाषा को अपनाया है और उदाहरण तथा प्रयोग की गई कहावतें भी आम लोगों के जीवन से लिए गए हैं। पुस्तकों में दिए गए लेखों और कहानियों को पढ़कर पाठक ऐसा अनुभव करता है कि लेखक उसी की बात कर रहा है।

    लेखक साहित्य की चाहे किसी भी विधा में अपने विचार प्रकट करे, समाज में निरन्तर चलने वाली हलचलों से अवश्य प्रभावित होता है या इसे इस प्रकार समझिए कि समाज में लगातार घटने वाली घटनाओं की प्रतिछाया उसकी ण्तियों में अवश्य झलकती है। जीने की राह’ के सभी भागों की रचना करने वाला लेखक भी इसका अपवाद नहीं है। समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अविरल परिवर्तन लाती घटनाएं और उनके प्रति लेखक की अपनी सोच तथा उसकी अपनी कल्पना, ये भी एक साथ मिलकर उसे लेखन सामग्री उपलब्ध् कराती हैं और यदि उनके साथ व्यक्ति के लम्बे जीवन के अनुभव का निचोड़ भी मिला हो तो लिखित सामग्री लोकप्रिय तथा पठनीय बन जाती है।

    समाज के प्रबुद्धजन भी ऐसे विचार पढ़कर न केवल लाभान्वित होते हैं, परन्तु उसके अनुभवों का उपयोग समाज कल्याण के कार्यों के लिए भी करते हैं। ‘जीने की राह’ के सभी भागों में लेखक ने समाज से सम्बंधित मुख्यतया ऐसे विषयों को चुना है जिनको पढ़कर समाज के एक बड़े वर्ग को लाभ मिल सके। आज संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं, विचारों के आपसी टकराव के कारण रिश्तों में खटास पैदा हो रही है, नैतिकता क्षीण होती जा रही है और राजनीति का प्रयोग लोग अपने स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। लेखक ने ऐसे गम्भीर विषयों पर अपने विचार प्रकट कर इन समस्याओं को हल करने के लिए कुछ सुझाव भी अपने पाठकों को दिए हैं। ‘रिश्तों के बंध्न’ पर बात कर उन्हें मजबूत और मधुर बनाने पर चर्चा की गई है तो ‘सहनशीलता’ पर लेख में जीवन में उसे अपनाने पर जोर दिया है। परिष्कृत जीवन जीने के लिए उसमें ‘संतुलन’ बनाए रखना बहुत आवश्यक है तो ‘व्यवहारकुशलता’लेखन में उसे समाज में समरसता पैदा करने का सूत्र बताया गया है।


    This article is shared by our contributor Dr. Vikas Baniwal, who is an Assistant Professor at the Ambedkar University, Delhi.

Viewing 1 post (of 1 total)

You must be logged in to reply to this topic.