मेरे जीवन का उद्देश्य – खुश रहो और खुशियाँ बाँटो

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intro picमेरा नाम सुरेखा राजेन्द्र लड्ढा हैं।  मै ६२ वर्षीय गृहणी हूँ जो ये मानती है की हमें जीवन सिर्फ एक बार ही मिलता हैं , इसलिए इस जीवन में हमे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हम खुद भी खुश रहे और दुसरो को भी खुश रखें।  मेरे हिसाब से कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता , इंसान की सोच सिर्फ बड़ी या छोटी होती हैं।  अगर हम सच्चे मन से लोगो की भलाई के लिए कोई कार्य करे तो उस कार्य को करने से न केवल हम दुसरो को खुशी देते है बल्कि खुद को भी खुश करते हैं।

 

मेरा जन्म रामगांव के एक जमींदार परिवार में हुआ था । रामगांव एवत्मान डिस्ट्रक्ट में बसा एक छोटा सा गाँव हैं। मैंने अपनी पूरी पढ़ाई एवत्मान डिस्ट्रिक्ट में  की जहाँ मैंने मराठी लिटरेचर में बी ए किया।  उस समय से लेकर अब तक मुझे मराठी और हिंदी पढ़ने और लिखने का बहुत शौक हैं।  मैंने मराठी में कुछ कविताये भी लिखी हैं।

मेरा परिवार

मेरे पिताजी एक ज़मींदार थे जो ज़मींदार होते हुए भी बहुत ही सीधे और दुसरो के हित के बारे में सोचने वाले इंसान थे। मेरी माँ भी बहुत ही सरल और सौम्य स्वभाव की थी। शायद ऐसे माँ बाप की संतान होने की वजह से मैं दुसरो के लिए हमेशा कुछ अच्छा करना चाहती हूँ  और उन्हें ख़ुशी देना चाहती हूँ। हमारे माँ और पिताजी ने हम पाँचो भाई बहेनो को बहुत ही प्यार के साथ पाला हैं और हमें अच्छी शिक्षा दिया हैं। हमारे बीच में अभी भी बहुत ही प्यार और अपनापान हैं।

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मेरे पति श्री राजेंद्र लड्ढा एक समझदार जीवन साथी होने के साथ साथ एक अच्छे मित्र भी है।  वो २०१२ में यूनाइटेड इंडिया इन्शुरन्स कंपनी के अमरावती ऑफिस से डिप्टी मैनेजर के  पद पर  रिटायर हुए।   हमारे दो बच्चे है, एक बेटा और एक बेटी।  बेटा एक बड़ी आईटी कम्पनी में काम करता हैं और अपने परिवार के साथ पुणे में रहता हैं।  मैं और मेरे पति अपने बेटे के साथ ही रहते है और बीच बीच में अमरावती में मेरे  ससुराल और रामगाव में मेरे मायके आते जाते रहते हैं।  और हमारी बेटी अपने परिवार के साथ हैदराबाद में रहती हैं।  दोनों बच्चों  और उनके परिवार से हमे बहुत ही प्यार और सम्मान मिलता हैं।

 

 

 

एक ग्रहणी के लिए उसका परिवार ही उसका सबकुछ होता हैं।  अगर उस परिवार में एकता और प्यार बना रहता है तो यह उसके लिए बहुत ही गर्व और सम्मान की बात होती हैं । मेरे परिवार ने मुझे यह सम्मान देकर गौरवान्वित किया हैं।

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स्वस्थ रहने के मूल मंत्र

उम्र के साथ साथ शरीर में कुछ बदलाव आते हैं पर मेरा मानना है की अगर हम समय पर अपने स्वास्थ पर ध्यान देना शुरू कर दे तो हम लम्बे समय तक स्वस्थ रह सकते है।

मैं स्वस्थ हूँ और इसके लिये मैं रोज़ सुबह टाइम से उठकर योगा और मॉर्निंग वॉक करती हूँ।  इसके साथ साथ मैं टाइम पर तीनों समय का खाना खाती  हूँ और हमेशा सकारात्मक सोचती हूँ।

जन कल्याण कार्य

Sakhi manchमुझे ऐसा लगता है की अगर हमारा जीवन किसी के काम न आया तो वह व्यर्थ हैं।  इसीलिए  अपने और अपने परिवार के कल्याण के साथ साथ मैं  दुसरो की भलाई के लिए भी कुछ करते रहना चाहती हूँ।  जब भी मुझे मौका मिलता है तो मै अपने गाँव रामगांव में गरीब बच्चो की पढ़ाई और स्वास्थ सम्बंधित ज़रूरतों के लिए कुछ पैसे दान करती हूँ।  इसके साथ साथ मैंने अमरावती में ११० महिलाओं का एक ग्रुप बनाया हैं जिसका नाम है “सखी मंच”।  हम सब मिलकर जान कल्याण का कार्य करते हैं।  जैसे पुराने पर अच्छे बर्तन और कपड़े एकठा करके उसे वृद्धा आश्रम और अनाथालय में बांटना  और गरीब बच्चो की पढ़ाई के लिए पैसे इकठा करना।

 

ये सब करके मुझे बहुत अच्छा लगता है और खुशी महसूस होती हैं। ये अहसास कही न कही मुझे मानसिक रूप से स्वस्थ रखता हैं ।

मेरा सन्देश

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अंत में मैं सबको यही कहना चाहूँगी की ये जिन्दगी न मिलेगी दोबारा इसलिए जो भी करना है वो अभी कर लो और खुलकर जिंदगी जी लो ।

 

 

 

 

 

 


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